✍बबिता राज शर्मा✍
जब माँ शब्द हमारे मुँह पर आता है तो जहन में स्वतः ही एक तस्वीर उभर आती है अपने आँचल से सिर को ढके चेहरे पर मनभावनी सी मुस्कान लिए जैसे कोई जादुई परी हमारे पास हो । हरदम शांत चित्त और मधुर मुस्कान तो जैसे कभी उसके चेहरे से हटती ही नही ।हर सवाल हर मुश्किल का हल तो चुटकी में ही कर देती । जब भी कभी उदास हो तो बिन कहे बिन देखे ही जान लेती । लिखी हुई पाती सा बांच लेती दूर से ही मेरे मन को । हम भी उलझा देते उन्हें उनकी ही बात में कुछ नही कह के पर वो भी जिद्दी सी बन जाती अपनी व्याकुलता के आधार पर । अब लगता है पँख लगाकर उड़ जाऊँ लगके गले दे दूँ जवाब जो पूछती थी अक्सर माँ अपनी हर बात में । पूछ लूँ उन अनकही अनसुलझी बातों के हल । घर के आँगन में गूँजती माँ की हँसी अलगनी पर टँगे उनके कपड़ो की सरसराहट रसोई से उठती सब्जी की महक और हलवे की खुशबु से महका पूरा मोहल्ला लगता है जैसे माँ पूरे गाँव को बधाई दे देती हो अपने बच्चों के आने की । पाँव तो जैसे जमीन पर ही नही टिकते उड़ती फुदकती जैसे कोई अल्हड़ बच्ची अपने खिलौने फिर से पाकर इतरा रही हो ।आँखों में अपने बच्चों के पढ़ लेना चाहती है वो उनके मन को अपने भीतर के हाल को और खुद अपनी मन की व्यथा परत दर परत मन के पर्दों में छुपा लेती है ।माँ भी तो हमारे बिना पूरी कहाँ होती थी जैसे अब हम माँ के बिना अधूरे है । माँ का अचानक से चले जानाआज भी विचलित कर जाता है ।आज भी अक्सर जब हम भाई बहन कोई चर्चा करते हैं कुछ समझ नही आता या पूछना होता है तो बरबस मुँह से निकल ही जाता है ' मम्मी से पूछ लो ' आहत हो जाते हैं सब फिर से याद करके कि माँ अब नहीँ है इस दुनिया में लेकिन आप न होकर भी हमारे अहसासों में रहोगी सदा 😢😢
नहीं मिलती फिर वो छाँव जो एक बार छिन जाये
वो माँ थी कोई पीपल की छाँव नहीं जो फिर से सुकूँ आ जाये
वो आँगन तो है पर नहीँ हो तुम वहाँ
ना है उस आँगन में वो पहले सी बैठके
वहाँ ख़ाली सा है घर का हर कोना हर जगह ख़ाली है
नहीँ भूलते वो पल जिनमें देखा था तुम्हारा चेहरा आखिरी बार
बीतेगे साल दर साल पर लगता है रहती हो तुम यूँही हमारे आसपास
😢😢Miss you maa ....😥😥
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