मेरी प्यारी "माँ"


✍प्रेरणा की कलम से ✍️


गोरी चिट्टी भोली सी एक औरत जिसको छोटी छोटी बातें समझने में थोड़ा समय लग जाता है दुनियादारी की कुछ ख़ास समझ भी नहीं है उसको क्योंकि उसकी दुनिया तो उसके बच्चों और पति तक ही सिमट गयी है। वो है मेरी प्यारी "माँ"..


सब कहते है कि बच्चे को संस्कार उसकी पहली गुरु "माँ" से ही मिलते है पर मेरे लिए यह पूरी तरह सच नहीं है बचपन में छोटे भाई बहन के आने से मैं बहुत जल्दी ही अपनी दादी के पास आ गयी थी इसलिए उस समय "मम्मा" को करीब से जानने समझने का मौका ही नहीं मिला और मैं भी उन्हें सबकी भांति "भोली गैय्या" ही समझती रही। 


पर अब जब वो मेरे सबसे करीब है तब मुझे उन्हें समझने का मौका मिला तो लगा की वो जीवन को सरल तरीके से जीने का सबसे बड़ा ज्ञान रखती है जिसको उनकी सबसे बड़ी कमी माना गया वो तो उनकी सबसे बड़ी ताक़त थी जिससे उन्होंने अपने परिवार को आज तक एक साथ इतनी विवधताओं के बावजूद बाँध कर रखा हुआ है। 


वो उनकी सरलता ही थी जिसकी वजह से उनके पति और बच्चों की वो "जान" है चाहे उनके बच्चे और पति के बीच में आपस में कितना ही मनमुटाव हो जाये पर मेरी माँ के लिए सबका लगाव एक जैसा ही है और यह उनकी भगवान् जी में आस्था और सरलता का ही परिणाम है कि उनकी बहू, दामाद, पोती और नातिन की भी जान बसती है उनमें।


वैसे तो जबसे माँ ने मुझे अपनी कोख में आने की इज़ाज़त दी थी तबसे ही वो मेरे लिए खास है पर आज "माँ के विशेष दिवस" पर उन्हें दिल और आत्मा से "धन्यवाद्' इस जीवन को इस दुनिया में लाने के लिए और इसे इतनी सरलता से इतनी अच्छा बनाने के लिए।


अपनी सरलता को यूं ही बनाये रखना माँ.. मेरी प्यारी माँ🙏💕❣️👩‍❤️‍💋‍👩


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